उत्तराखंड : प्रोन्नति में आरक्षण पर तकरार, सरकार-कर्मचारी आमने-सामने
Saturday, 07 March 2020 19:46

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देहरादून: उत्तराखंड में इन दिनों सरकार और आरक्षित कोटे के सरकारी कर्मचारी प्रोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। सरकार और अदालत में से जब किसी ने राहत नहीं दी तो हजारों की संख्या में राज्य सरकार के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। इससे आम लोगों को सरकारी कामकाज के लिए इधर-उधर धक्के खाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

कर्मचारी हर हाल में पदोन्नति में आरक्षण लेने के लिए अड़े हुए हैं, जबकि सूबे के हुक्मरान फिलहाल दो टूक कह रहे हैं कि इस समस्या का समाधान हड़ताल से कतई नहीं होना है।

राज्य सरकार में आरक्षित कोटे के तहत नियुक्त हजारों कर्मचारी बीते सप्ताह से तकरीबन हर जिले में हड़ताल पर हैं। हड़ताल की शुरुआत तब हुई, जब नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार में पदोन्नति में आरक्षण के तर्क को नहीं माना।

हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले को सही करार दिया। इससे दोनों ही अदालतों में आए फैसले के बाद राज्य सरकार ने चैन की सांस ली। अदालतों के फैसले ने राज्य सरकार में आरक्षण के तहत नियुक्त कर्मचारियों को बेचैन कर दिया है। आरक्षण कोटे के तहत नियुक्त हजारों कर्मचारी इस बात पर अड़ गए हैं कि सरकार उनका हकछीन रही है।

संबंधित कर्मचारी वर्ग समस्या को लेकर राज्य सरकार के पास पहुंचे। राज्य सरकार ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देकर आगे बढ़ा दिया। सरकार का कहना था कि हम सुप्रीम कोर्ट व राज्य हाईकोर्ट के फैसले को मानेंगे, जोकि कानूनन और नियमानुसार मान्य भी होना चाहिए। जबकि खुद को पीड़ित जता रहे कर्मचारियों का एक धड़ा चाह रहा है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करे।

राज्य सरकार के प्रवक्ता और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने फोन पर आईएएनएस से कहा, "इस समय राज्य विधानसभा का सत्र चल रहा है, जोकि 25 और 27 मार्च तक चलना है। इसके बाद ही इस मुद्दे पर कुछ विचार किया जाएगा।"

एक सवाल के जबाब में उन्होंने कहा, "हड़ताल पर सभी कर्मचारी नहीं गए हैं। कुछ कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की बात सुनने में आई है। मैं तो कर्मचारियों से राज्य सरकार का प्रतिनिधि होने के नाते यही कहूंगा कि हड़ताल किसी समस्या का समाधान नहीं है। सरकार को वक्त दिया जाए। सत्र समाप्त होने के बाद सोचा जाएगा कि आखिर कानूनन क्या मुनासिब होगा।"

-- आईएएनएस

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