दो माह बाद पंजाब में ट्रेनों को ग्रीन सिग्नल, किसानों के राजी होने पर कैप्‍टन सरकार ने रेलवे को लिखा पत्र
Sunday, 22 November 2020 10:20

  • Print
  • Email

चंडीगढ़/फिरोजपुर:  पंजाब में किसानों के ग्रीन सिग्‍नल के बाद दो महीने बाद ट्रेनाें के चलने की उम्‍मीद है। किसानों संगठन 23 नवंबर से सभी जगहों से रेल ट्रैक से हटने को राजी हो गए हैं। किसान मालगाडी और यात्री ट्रेनों दोनों को चलने देने पर सहमति जताई है। इसके बाद रेलवे ने भी सकारात्‍मक रुख दिखाया है। फिरोजपुर रेल मंडल के डीआरएम ने कहा है कि रेलवे पंजाब में ट्रेनों का परिचालन शुरू करने काे पूरी तरह तैयार है। इससे राज्‍य में 23 नंवबर से फिर से रेल सेवा शुरू होने की संभावना है। पंजाब सरकार ने भी राज्‍य में यात्री और मालगाडियों का परिचालन शुरू करने के लिए अनुरोध पत्र लिखा है।

केंद्रीय कृषि सुधार कानूनों का पिछले दो महीने से विरोध कर रहे पंजाब के 30 किसान संगठन 23 नवंबर से अगले 15 दिन के लिए यात्री ट्रेनों व मालगाडिय़ां चलाने देने पर सहमत हो गए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ हुई बैठक में किसान नेताओं ने रेल ट्रैक क्षेत्र खाली करने पर सशर्त सहमति दी। उन्होंने केंद्र सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि उनके साथ बातचीत शुरू करके मसले का हल निकाले। साथ ही स्पष्ट किया कि 26 और 27 नवंबर को दिल्ली चलो आंदोलन को स्थगित नहीं किया जाएगा।

दूसरी ओर, किसानों के साथ बैठक के बाद पंजाब सरकार ने राज्‍य मे रेल सेवाएं फिर से शुरू करने के लिए औपचारिक अनुरोध पत्र भेजा। इस पत्र में किसानों के साथ वार्ता में बनी सहमति का हवाला देते हुए पंजाब में यात्री और मालगाडि़यों का परिचालन फिर से शुरू करने का अनुरोध किया गया है।

मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि किसान संगठन यात्री ट्रेन व मालगाडिय़ां चलाने पर सहमत हैैं। रेलवे ट्रैक व स्टेशन पहले ही खाली कर दिए गए थे और अब सोमवार तक स्टेशनों की पार्किंग भी खाली कर दी जाएगी, जिसके बाद रेलवे के पास गाडिय़ां न चलाने का कोई बहाना नहीं बचेगा।

पंजाब भवन में किसान संगठनों के साथ हुई बैठक में मुख्‍यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसान नेताओं को रेल बंद होने के कारण पंजाब को हो रहे नुकसान का हवाला दिया। उन्‍होंने कहा कि जब राज्य सरकार केंद्रीय कानूनों के खिलाफ किसानों का साथ दे रही है तो किसानों को भी सरकार को सहयोग देना चाहिए। कैप्टन ने कहा कि वह जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करके किसानों की मांगें मानने के लिए दबाव बनाएंगे।

बैठक के दौरान किसान संगठनों ने गन्ने की कीमत तय करने, पिछला बकाया तुरंत अदा करने, धान की खरीद के लिए बंद किए गए खरीद केंद्र दोबारा खोलने व कपास खरीद पर आढ़त किसानों से न लिए जाने की मांग भी रखी। बलबीर सिंह राजेवाल ने किसानों की मांगों को लेकर सभी दलों के एकजुट न होने पर सवाल उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वह तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाएं। इस पर कैप्टन ने कहा कि उन्होंने इन कानूनों के खिलाफ विधानसभा में सभी दलों को एकजुट किया था परंतु बाद में शिरोमणि अकाली दल और आप फिर अलग हो गए।

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

Don't Miss