तिरुवनंतपुरम: केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने गुरुवार को कहा कि पिछले 24 घंटों में 60,476 नमूनों की जांच में 5,376 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि 5,590 लोग ठीक हो चुकेहैं। कुल 5,56,378 मरीज ठीक हो गए, जबकि 61,209 सक्रिय मामले हैं।

फिर 31 कोविद मरीजों की मौत की सूचना मिली है। अब तक 2,329 मरीजों की मौत हो चुकी है।

अस्पतालों में 15,256 लोग भर्ती हैं। इस समय 473 हॉटस्पॉट हैं।

--आईएएनएस

एसजीके

मुंबई: डिस्कवरी चैनल ने इस साल मार्च में भारत में लॉन्च होने के बाद भारत में अपनी स्ट्रीमिंग सेवा के लिए मूल प्रसारण सामग्री बनाने की घोषणा की है। चैनल ने बॉलीवुड हस्तियों में मनोज बाजपेयी, राणा दग्गुबाती, नीरज पांडे और रणदीप हुड्डा को टीम में शामिल किया है। ये उसकी योजनाओं को आगे बढ़ाएंगे।

9 दिसंबर से शुरू होने वाले ओटीटी प्रसारण की योजना बनाई गई है। लाइन-अप में राणा दग्गुबाती की विशेषता वाले 'मिशन फ्रंटलाइन', 'लद्दाख वॉरियर्स : द सन्स ऑफ द सॉइल' को रणदीप हुड्डा द्वारा हिंदी में सुनाया गया और 'सीनाली का रहस्य : डिस्कवरी ऑफ द सेंचुरी' जैसे शो शामिल हैं, जो फिल्म निर्माता नीरज द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं। मेजबान के रूप में मनोज बाजपेयी के साथ पांडे।

--आईएएनएस

एसजीके

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में रानीगंज-आसनसोल बेल्ट में अवैध कोयला खनन से जुड़े तमाम लोगों पर शिकंजा कसने के लिए संघीय जांच एजेंसियां लगातार छापेमारी कर रही हैं। पिछले करीब चार दशकों से कोयले के अवैध संचालन का केंद्र बना यह इलाका इन दिनों सुर्खियों में है और केंद्रीय एजेंसी इस खनन साम्राज्य से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली खंगालने में जुटी हुई हैं।

अनूप मांझी उर्फ लाला और जोयडेब मोंडल जैसे कुछ नाम केंद्रीय एजेंसियों की सूची में फिर से शामिल हो गए हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस क्षेत्र में अवैध रूप से कई बड़े माफिया शामिल हैं, जो क्षेत्र में 'ब्लैक डायमंड' के अवैध खनन गिरोह में शामिल हैं।

सूत्रों का कहना है कि वे शीर्ष राजनीतिज्ञों, स्थानीय प्रशासन और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के अधिकारियों के साथ मिलकर इस गोरखधंधे में शामिल रहे हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रवक्ता ने दिल्ली से आईएएनएस को बताया, "हम मामले की जांच कर रहे हैं। हम और कुछ नहीं कह सकते।"

यह पूछे जाने पर कि क्या एजेंसी ने लाला और जोयडेब मोंडल को पकड़ लिया है, इस पर अधिकारी ने कहा, "अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।"

सीबीआई ने पिछले हफ्ते (28 नवंबर को) पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार और पड़ोसी राज्य झारखंड के विभिन्न जिलों में 45 स्थानों पर छापे मारे थे। 22 अलग-अलग टीमों में बंटी सीबीआई की भ्रष्टाचार-रोधी शाखा ने रानीगंज-आसनसोल बेल्ट में कोयला-तस्करी के रैकेट के संबंध में छापे मारे थे।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अवैध कोयला हैंडलिंग का पूरा सिंडिकेट संगठित तरीके से होता है। ईसीएल लीजहोल्ड क्षेत्र में अवैध कोयला खनन के संचालन को तीन अलग-अलग हिस्सों में विभाजित किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, इस अवैध खनन से जुडे तमाम लोग विभिन्न भाग या पार्ट्स में शामिल होते हैं। सभी बड़े माफिया तीसरे भाग में शामिल होते हैं, क्योंकि मुख्य लाभ केवल वहीं होता है। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आसनसोल-रानीगंज क्षेत्र में लगभग 3,500 अवैध कोयला खदानों में कम से कम 35,000 लोग प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं, जबकि अन्य 40,000 को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है। कार्य बल ज्यादातर झारखंड के पड़ोसी राज्यों से है। संगठित अवैध खनन सिंडिकेट से जुड़े कुल जनशक्ति का केवल पांच प्रतिशत स्थानीय है।

सूत्रों ने कहा, "अवैध कोयला खनन का विस्तार सलानपुर से शुरू होता है और बांकुरा सीमा में गोरखंडी, आसनसोल उत्तर और दक्षिण, जेके नगर, बाराबनी, पांडेबेश्वर, कुनुश्तारिया, रानीगंज, उखरा, बललपुर जैसे क्षेत्रों में फैला है। 1973 में ईसीएल के राष्ट्रीयकरण के बाद 80 के दशक की शुरूआत में खनन शुरू हुआ था।"

सूत्रों ने हालांकि शक्तिशाली माफिया के कारण उनका नाम नहीं लिया।

28 नवंबर को की गई छापेमारी कोयला तस्करी के सरगना कोलकाता व आसनसोल में रहने वाले अनूप मांझी उर्फ लाला और उसके करीबी व सहायकों के ठिकानों पर की गई थी। अवैध कोयला खनन मामले में बंगाल के कोयला माफिया मांझी उर्फ लाला व उसके करीबियों के ठिकानों पर सीबीआई की ओर से कार्रवाई कई दिनों तक जारी रही।

सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधी शाखा की ओर से यह कार्रवाई की गई है। खबरों के मुताबिक, अनूप मांझी के आसनसोल, दुगार्पुर, रानीगंज व पुरुलिया स्थित कार्यालयों, घर और उनके करीबियों के यहां छापेमारी की गई।

सीबीआई के एक सूत्र ने 28 नवंबर को बताया था कि ईस्ट बंगाल फील्ड्स लिमिटेड के अधिकारियों और कुछ अन्य व्यक्तियों के साथ पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में भी छापेमारी की गई है।

सीबीआई के एक सूत्र ने आईएएनएस को बताया कि कोयला माफियाओं के परिसरों सहित चार राज्यों के 45 स्थानों पर तलाशी ली गई है और अपराध से जुड़े तमाम अपराधियों की तलाश की जा रही है।

--आईएएनएस

एकेके/एसजीके

मुंबई: बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ गुरुवार की शाम बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इसमें रनौत पर उनके ट्विटर अकाउंट के जरिए लगातार देश में 'नफरत और घृणा' फैलाने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि कंगना के ट्वीट से देश में लगातार नफरत फैलाने, देशद्रोह फैलाने की कोशिश होती है और देश को उनके अतिवादी ट्वीट्स से विभाजित करने का प्रयास किया जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया में उन्होंने एक धर्म विशेष को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर लिखा कि ट्विटर एकमात्र ऐसा मंच नहीं है जहां वह अपनी राय दे सकती हैं।

कंगना ने ट्विटर पर लिखा है, "मैं लगातार अखंड भारत की बात कर रही हूं। टुकड़े-टुकड़े गैंग से हर रोज लड़ रही हूं और मुझ पर ही देश बांटने का आरोप लग रहा है। वाह! क्या बात है, खैर मेरे लिए ट्विटर अकेला ऐसा प्लेटफॉर्म नहीं है।"

उन्होंने कहा, "टुकड़े गैंग याद रखना, मेरी आवाज दबाने के लिए तुम्हें मुझे मारना होगा और फिर मैं हर भारतीय के जरिए बोलूंगी और यही मेरा सपना है। तुम जो भी करोगे, मेरा सपना और मकसद ही सच होगा। इसीलिए मैं खलनायकों को प्यार करती हूं।"

--आईएएनएस

एकेके/एसजीके

 

चेन्नई: अभिनेता रजनीकांत की राजनीतिक पार्टी बनाने के ऐलान पर तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री और एआईएडीएमके समन्वयक ओ.पन्नीरसेल्वम ने फैसले का स्वागत करते हुए गुरुवार को कहा कि दोनों दल गठबंधन बना सकते हैं। गुरुवार को, रजनीकांत ने कहा कि वह जनवरी 2021 में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाएंगे और इस बारे में एक घोषणा 31 दिसंबर, 2020 को की जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि राज्य में सरकार और राजनीतिक व्यवस्था को भी बदलने की जरूरत है।

रजनीकांत की घोषणा पर प्रतिक्रिया पन्नीरसेल्वम ने संवाददाताओं से कहा कि अभिनेता की पार्टी सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक को प्रभावित नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि राजनीति में बदलाव हो सकता है और अगर कोई अवसर मिलता है, तो रजनीकांत की पार्टी के साथ गठबंधन हो सकता है।

--आईएएनएस

एसजीके

नई दिल्ली: किसान नेताओं ने विज्ञान भवन में गुरुवार को चली सात घंटे की बैठक में केंद्र सरकार के तीनों मंत्रियों से दोटूक कह दिया कि कृषि कानूनों की वापसी तक आंदोलन जारी रहेगा। सरकार के कई मांगों पर नरम रुख के बावजूद किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें संशोधन मंजूर नहीं है, बल्कि वे कानूनों का खात्मा चाहते हैं। किसान नेताओं ने तीन कृषि कानूनों के अलावा हाल में प्रदूषण पर मोटा जुर्माना और सजा वाले एक्ट को भी हटाने की मांग की है।

पंजाब के क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता डॉ. दर्शनपाल ने आईएएनएस को विज्ञान भवन में चौथे दौर की हुई बैठक का पूरा हाल बताया। उन्होंने कहा कि सभी किसान नेता पूरी तैयारी के साथ मीटिंग में पहुंचे थे। पहले मंत्रियों ने आधे घंटे में किसान कानूनों के पक्ष में बात रखी। इसके बाद हमने उन्हें एक-एक प्वाइंट के आधार पर बताया कि कैसे तीनों कानून किसान विरोधी हैं।

दर्शनपाल ने बताया कि किसान प्रतिनिधियों के दबाव बनाने पर मंत्रियों ने कहा कि किसानों के पक्ष में सरकार नए कानूनों में कुछ चेंज कर सकती है। प्रदूषण रोकने के लिए बने कानून से खेती को हटाने की भी बात मंत्रियों ने कही। एमएसपी की गारंटी का भी सरकार ने आश्वासन दिया। सरकार ने चार दिसंबर को फिर से बैठक की बात कही, लेकिन किसान संगठनों ने इसे पांच दिसंबर को करने के लिए कहा। ताकि चार दिसंबर को किसान संगठन मीटिंग कर अपनी रणनीति तय कर सकें।

दर्शनपाल ने बताया कि कुल मिलाकर सरकार ने तीन कृषि कानून और एक प्रदूषण वाले कानून को वापस लेने की जगह सिर्फ संशोधन की बात कही है, लेकिन हमें संशोधन मंजूर नहीं है। अब पांच दिसंबर की बैठक पर नजर है।

किसान नेता हर्षविंदर सिंह ने आईएनएस से कहा, "मंत्रियों ने हमसे पूछा कि आप कमियां बताइए। तो हमने कहा-आपके कानून में कमियां ही कमियां हैं। सारा बिल कमियों से भरा हुआ है। सरकार ने कहा कि कल हम अपनी मीटिंग कर किसानों की मांगों पर सोचेंगे तो हमने भी कहा कि कल किसान संगठन भी मीटिंग कर सरकार के रवैये पर सोचेंगे। दोनों पक्ष अपनी-अपनी मीटिंग में विषयों पर सोचने के बाद पांच दिसंबर को फिर वार्ता की मेज पर होंगे।"

पंजाब के किसान नेता कुलदीप सिंह ने बताया कि चौथे दौर की बैठक बेनतीजा इसलिए रही कि सरकार की मंशा साफ नहीं है। सरकार ने अभी तक अड़ियल रुख दिखाया है। किसानों के हौसले बुलंद हैं। किसान खाली हाथ नहीं जाने वाले हैं। जब तक किसान विरोधी कानून समाप्त नहीं होंगे, आंदोलन चलता रहेगा।

--आईएएनएस

एनएनएम/एसजीके

नई दिल्ली: वर्तमान समय में 5जी नेटवर्क तेजी से आगे बढ़ रहा है और उद्यम संचार नेटवर्क के प्रति अपने दृष्टिकोण में एक मोड़ से गुजर रहे हैं। इस संबंध में सीएक्सओ सिएंस सीरीज में चर्चा की गई, जिसमें एक वैश्विक इंजीनियरिंग एवं डिजिटल सॉल्यूशंस कंपनी वॉकरवेसल्स टेलिकॉम एवं बीटी सिएंस के सदस्यों ने हिस्सा लिया।

पैनल में शामिल सदस्यों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि इस क्षेत्र में संचार अवसंरचना नेटवर्क के क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश हो रहे हैं और चल रहे डिजिटल परिवर्तन से न केवल उपयोगकर्ता अनुभव में वृद्धि होगी, बल्कि यह एक अद्वितीय प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भी प्रदान करेगा।

सत्र के लिए प्रारंभिक टिप्पणी करते हुए सिएंट में वरिष्ठ उपाध्यक्ष और संचार एवं उपयोगिता मामलों के प्रमुख प्रभाकर अटला ने कहा, "संचार हमारे पास सबसे बड़े व्यावसायिक कार्यक्षेत्रों में से एक है और यह कंपनी के लिए रणनीतिक फोकस का एक क्षेत्र है।"

उन्होंने कहा, "हमारे प्रस्ताव और हमारे सभी ग्राहकों और उद्योग में योगदान तीन चीजों के आसपास है। इनमें इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्च र डिजाइन, स्मार्ट ऑपरेशंस और एंटरप्राइज नेटवर्क एफिसिएंशी शामिल हैं।

उन्होंने कहा, "हम अपने ग्राहकों से संचार और नेटवर्क के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश देख रहे हैं। नेटवर्क डेंसिफिकेशन फोकस का प्रमुख क्षेत्र है और हमें आने वाले वर्षों में 30-50 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है। हम अगले 12 महीनों में 5-जी रोलआउट के एक महत्वपूर्ण त्वरण का अनुमान लगा रहे हैं।"

वॉकरवेसल्स टेलीकॉम के सीईओ, विदो वान डी मस्त ने कहा, "5-जी रोलआउट उद्यमों के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है।"

उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे के लिए स्मार्ट और इंटेलिजेंट तकनीक का मतलब है कि इसे संचालित करना आसान है और हर किसी के लिए एक खुली पहुंच होनी चाहिए और सुरक्षा एवं खुले नेटवर्क के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंत में इंटेलिजेंट बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता में सुधार करना चाहिए।

--आईएएनएस

एकेके/एसजीके

नई दिल्ली: किसान आंदोलन को सुलझाने के लिए विज्ञान भवन में गुरुवार को हुई चौथे दौर की बैठक भले किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, लेकिन मांगों को लेकर सरकार का रुख पहले से नरम हुआ है। तीनों कानूनों को लेकर किसानों के तेवर को देखते हुए केंद्र सरकार कई विषयों पर विचार करते हुए बीच का रास्ता निकालने की दिशा में आगे बढ़ गई है। कानून सरकार भले वापस नहीं लेगी, लेकिन किसानों की जिद को देखते हुए कुछ पहलुओं पर नए उपाय करने की तैयारी है। नए कानून से मंडियों को लेकर उपजी आशंकाओं को दूर करने के लिए सरकार व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन की पहल करने की सोच रही है। गुरुवार को सकारात्मक माहौल में देर तक चली बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि पांच दिसंबर की बैठक निर्णायक होने वाली है। उधर, किसान नेताओं ने आईएएनएस से स्पष्ट कहा है कि उन्हें बीच का रास्ता नहीं चाहिए, बल्कि वे तीनों कानूनों को वापस लिए जाने तक आंदोलन चलाएंगे।

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश की मौजूदगी में गुरुवार को साढ़े 12 बजे से विज्ञान भवन, नई दिल्ली में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ चौथे दौर की बातचीत शुरू हुई। यह बैठक करीब सात घंटे तक चली। सरकार के अनुरोध पर इस बैठक में सभी किसान प्रतिनिधि तीनों कानूनों पर अपनी आपत्तियों को लिखकर ले गए थे, जिससे प्वाइंट टू प्वाइंट बातचीत में आसानी रही।

कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने किसान नेताओं से कहा, "सरकार खुले मन से चर्चा कर रही है। आप अपने मन से यह बात निकाल दें कि सरकार किसानों को लेकर किसी तरह का इगो रखती है। किसान भाइयों के साथ सरकार खड़ी है। वार्ता के जरिए ही सकारात्मक परिणाम सामने आ सकता है।"

तीनों मंत्रियों ने सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से पहले कानून को लेकर मन में उठने वाले सवाल पूछे। लगभग सभी किसान प्रतिनिधियों ने सितंबर में बने तीनों कृषि कानूनों को हटाने के साथ प्रदूषण के लिए जुर्माने के नियम को निरस्त करने की मांग की। किसानों ने आगे आने वाले इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट एक्ट पर भी नाराजगी जाहिर की।

किसान नेताओं ने मंडियों और एमएसपी के खत्म होने को लेकर आशंकाएं व्यक्त की, जिस पर कृषि मंत्री तोमर ने उनकी सभी मांगों पर सरकार के विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पहले की तरह जारी रहेगा। सरकार इस बात पर विचार करेगी कि एमपीएमसी सशक्त हो तथा इसका उपयोग और बढ़े। नए कृषि कानून में, एपीएमसी की परिधि के बाहर निजी मंडियों का प्रावधान होने से इन दोनों में कर की समानता के संबंध में भी विचार किया जाएगा। कृषि उपज का व्यापार मंडियों के बाहर करने के लिए व्यापारी का रजिस्ट्रेशन होने के बारे में भी विचार होगा। विवाद के हल के लिए एसडीएम या न्यायालय, क्या व्यवस्था रहे, इस पर विचार किया जाएगा।

किसानों ने कॉट्रैक्ट फार्मिग को लेकर भी आशंकाएं व्यक्त की। इस पर कृषि मंत्री ने कहा कि किसान की जमीन की लिखा-पढ़ी करार में किसी सूरत में नहीं की जा सकती, फिर भी यदि कोई शंका है तो उसका निवारण करने के लिए सरकार तैयार है।

अब पांच दिसंबर को दोपहर दो बजे से होने वाली बैठक में, किसान संगठनों की ओर से उठाए बिंदुओं पर फिर वार्ता की जाएगी। कृषि मंत्री नरेंद्र को यह बैठक निर्णायक होने की उम्मीद है।

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जयपुर: नए कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में किसानों के जारी आंदोलन का समर्थन करते हुए, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति ने गुरुवार को जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग को दो घंटे के लिए अवरुद्ध कर दिया। समिति द्वारा जारी एक प्रेस नोट में कहा गया, "भाजपा-आरएसएस संचालित मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ नारे लगाए गए।"

राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक सभा बुलाई गई थी, जिसमें सीपीआई नेताओं ने कहा था कि मोदी सरकार न केवल 'किसान विरोधी' और 'मजदूर विरोधी' है बल्कि 'जनविरोधी' भी है।

नेताओं ने कहा, "मोदी सरकार केवल उद्योगपतियों के बारे में चिंता है और आम लोगों के बारे में नहीं है, यदि केंद्र अपने किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने में विफल रहता है, तो बड़े पैमाने पर लड़ाई शुरू की जाएगी।"

अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य सचिव संजय माधव के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन में कई राजनीतिक दलों, श्रमिक संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया, जिनमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्‍सवादी (माकपा), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, समाजवादी पार्टी, सीटू, शामिल हुए।

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चंडीगढ़: हरियाणा के नगर निकायों के चुनाव 27 दिसंबर को होंगे और नतीजे 30 दिसंबर को आएंगे। राज्य चुनाव आयुक्त दलीप सिंह ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नामांकनपत्र 11 से 16 दिसंबर तक दाखिल किए जाएंगे।

अंबाला, पंचकूला और सोनीपत में नगर निगम के सभी वार्डो के मेयर और सदस्य के लिए चुनाव होंगे और रेवाड़ी, सांपला, धारूहेड़ा (रेवाड़ी) और उकलाना (हिसार) में नगर परिषद के अध्यक्ष और सदस्य के लिए भी चुनाव होंगे।

इसके अलावा, इंद्री (करनाल), भूना (फतेहाबाद), राजौंद (कैथल), फतेहाबाद और सिरसा में नगर समिति में उपचुनाव के लिए भी अधिसूचना जारी की गई है।

उन्होंने कहा कि आदर्श आचार संहिता गुरुवार से लागू हो गई है।

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आरएचए/एसजीके

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