26/11: पर्दे पर आज भी छाप छोड़ते हैं हमलों के निशान
Wednesday, 25 November 2020 16:08

  • Print
  • Email

नई दिल्ली: मुंबई में 26/11 यानी 26 नवंबर को हुए हमले को 12 साल हो गए हैं। लेकिन आज भी यह आधुनिक भारतीय इतिहास का दुखद अध्याय शोबिज के कैनवास पर अपनी छाप छोड़ता रहता है।

गौरतलब है कि 26 नवंबर, 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों ने समुद्री रास्ते से मुंबई में घुसकर शहर के विभिन्न हिस्सों में तबाही मचाई थी। उन्होंने 160 से अधिक लोगों को मार डाला। इस हमले के दौरान 9 आतंकवादी भी मारे गए, जबकि एक मोहम्मद अजमल कसाब, उसे जिंदा गिरफ्तार किया गया और आखिरकार नवंबर 2012 में उसे फांसी दे दी गई।

आतंकवादियों ने शहर के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन, ताज महल पैलेस होटल, कैफे लियोपोल्ड, कामा और अलब्लेस अस्पताल, नरीमन हाउस और ओबेरॉय-ट्राइडेंट होटल जैसे जगहों पर बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी।

हालांकि इस घटना को एक दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज भी यह डरावनी घटना फिल्मकारों को पर्दे पर उसे दिखाने के लिए प्रेरित करती है और कई फिल्मकारों ने इस घटना को अलग-अलग ²ष्टिकोण से पेश करने का प्रयास किया।

आतंकवादियों से लोहा लेने वाले बहादुर वीरों से लेकर अपनों को खो चुके लोगों के दु:ख तक, सुरक्षा खामियों से लेकर आतंकवादियों की सोच तक, फिल्मकारों ने इस त्रासदी से जुड़े विभिन्न वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना जारी रखा है।

इनमें जल्द ही आ रही निखिल आडवाणी की बहुप्रतीक्षित वेब सीरीज 'मुंबई डायरीज 26/11' है, जिसमें कोंकणा सेनशर्मा और मोहित रैना ने अभिनय किया है। कहानी के आधार को उजागर नहीं किया गया है। वहीं आडवाणी के शो में हमले के एक काल्पनिक कहानी को दिखाया जाएगा, जो कामा अस्पताल की घटनाओं पर केंद्रित होगा।

वहीं इसी हमले से जुड़े एक पहलू को तेलुगू सुपरस्टार महेश बाबू ने फिल्म निर्माण के जरिए पेश करने का फैसला लिया। उन्होंने एक स्क्रिप्ट चुनी, जिसमें 26/11 के हमले में शहीद हुए एनएसजी कमांडो संदीप उन्नीकृष्णन को सलाम किया है। इसका शीर्षक 'मेजर' है, जिसका निर्देशन शशि किरण टिक्का करने वाले हैं, इसमें तेलुगू अभिनेता अदिवी सेश शहीद की भूमिका निभाएंगे। महेश बाबू ने इसे तेलुगू भाषा के साथ-साथ हिंदी में प्रस्तुत करने का फैसला लिया है।

यह त्रासदी दर्शकों के लिए कितनी प्रासंगिक बनी हुई है, इसका पता हाल ही में वेब शो 'स्टेट ऑफ सीज: 26/11' की सफलता से आंकी गई। यह शो इस साल की शुरुआत में प्रदर्शित हुई।

अभिनेता अर्जुन बिजलानी, अर्जन बाजवा और विवेक दहिया के साथ एनएसजी कमांडो की भूमिका निभाते हुए, यह शो 26/11 की अनकही कहानियों को बताता है, मुख्य रूप से वर्दी में पुरुषों की वीरता को उजागर करता है। यहां तक कि उनकी 26/11 सागा को लेकर मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया ने निमार्ताओं को 'स्टेट ऑफ सीज' को एक फ्रेंचाइजी में बदलने के लिए प्रेरित किया। वे जल्द ही वेब फिल्म 'स्टेट ऑफ सीज: अक्षरधाम' के साथ वापस आएंगे।

स्टेट ऑफ सीज: 26/11 के क्रिएटर अभिमन्यु सिंह ने कहा, "मैंने कहानी को दो मुख्य कारणों से बनाया है। भारत में आतंकवाद रोधी अभियानों में उनके अच्छे कामों के बावजूद नेशनल सिक्योरिटी गार्ड पर वास्तव में कुछ भी नहीं बनाया गया है। हमें अपने सुरक्षाकर्मियों के प्रति सम्मान दर्शाने की आवश्यकता है, जो सभी बाधाओं के खिलाफ हमारे लिए लड़ते हैं और अपने जीवन की परवाह नहीं करते हैं। मुझे लगता है कि ऐसा कुछ है जिसे भारत को देखने की जरूरत है।

उन्होंने आगे कहा, "दूसरा उद्देश्य यह भी था कि हमारे सिस्टम में झूठ बोलने वाले लोगों को दिखाया जाए, जिन्हें सुधरने की आवश्यकता है। इस तरह के संकटों से निपटने के लिए हमें बेहतर तरीके से तैयार रहना चाहिए। हमें अपने इतिहास से कुछ सीखने की जरूरत है, और निमार्ताओं के रूप में हमारा उद्देश्य यही था।"

नीरज पांडेय की जासूसी एक्शन थ्रिलर सीरीज 'स्पेशल ऑप्स' एक काल्पनिक कहानी है, लेकिन इसकी प्रेरणा भारत में पिछले 19 सालों में हुए आतंकी हमलों, जिसमें 26/11 भी है, उसमें भारतीय खुफिया विभाग से ली गई है। शो के एक हाइलाइट सीन में हिम्मत सिंह (के के मेनन द्वारा निभाया गया किरदार) आतंकवादी अजमल कसाब से पूछताछ करते हुए दिखाई देता है।

शो के बारे में बात करते हुए के के ने कहा था, "26/11 एक ऐसा दिन था, जब पूरा देश जाग रहा था। 'स्पेशल ऑप्स' भारतीय खुफिया की भूमिका के लिए एक अनूठा परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है। अंडरकवर एजेंट हमारे समय के सच्चे गुमनाम नायक हैं। 'स्पेशल ऑप्स' इन एजेंटों के जीवन को सामने लाने की कोशिश करता है, जो कई दुर्भाग्यपूर्ण हमलों के पीछे मास्टरमाइंड को पकड़ने की कोशिश करते हैं। भारतीय इंटेलिजेंस हमारे देश के लिए बहुत कुछ कर रही है और हमें उनके ऋणी होने की आवश्यकता है।"

26/11 के हमलों ने इन सालों में कई फिल्मों को जन्म दिया है, हालांकि सभी समान रूप से सराहनीय नहीं रही हैं। इसमें एंथनी मारस द्वारा निर्मित 'होटल मुंबई' को लिया जा सकता है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनाया गया था। इसमें देव पटेल और अनुपम खेर हैं। वहीं राम गोपाल वर्मा ने 'द अटैक्स ऑफ 26/11' बनाया। वहीं नसीरुद्दीन शाह द्वारा अभिनीत एक लघु फिल्म 'रोगन जोश' भी है, जिसमें एक परिवार पर त्रासदी के भयावह प्रभाव को दर्शाया गया है।

वहीं कमर्शियल बॉलीवुड स्पेस में कबीर खान की 'फैंटम' रही है, जो 26/11 के मुंबई हमलों के बाद अभिनेत्री कटरीना कैफ और सैफ अली खान के साथ बनाई गई थी।

इनमें हंसल मेहता की 'शाहिद' ने बहुत ही गहरी छाप छोड़ी थी। फिल्म में 26/11 के हमलों के बैकग्राउंड के साथ भारतीय मुस्लिम पहचान दिखाया गया था। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता रही इस भूमिका में वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहिद आजमी के रूप में राजकुमार राव नजर आए थे। फिल्म में आजमी की कहानी दिखाई जाती है, जिसमें उसके युवा अवस्था से लेकर वकील बनने तक और 26/11 के हमले के आरोपी रहीम अंसारी का बचाव करने तक का सफर दिखाया गया है।

ओटीटी पर पेश किए गए विभिन्न काल्पनिक आतंकवादी कहानियों पर 26/11 के हमलों का अप्रत्यक्ष प्रभाव रहा है। उदाहरण के लिए मनोज बाजपेयी-स्टारर 'द फैमिली मैन', जिसमें वह श्रीकांत तिवारी के तौर पर आतंकवादी हमले को रोकने का प्रयास करते हैं। सीरीज की शुरुआत आतंकी संदिग्धों की गिरफ्तारी से होती है जो भारत में '26/11 से भी बदतर' कुछ करने की योजना बना रहे होते हैं।

वहीं अभी जो परियोजनाएं आ रही हैं, उनमें एक अमेरिकी टीवी सीरीज भी है, जो 26/11 के मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड पर आधारित है। सीमित सीरीज डेविड कोलमैन हेडली के जीवन और 2008 के हमलों में उसके कथित साथी तहव्वुर हुसैन राणा के बारे में बताएगी। परियोजना के बारे में अभी तक ज्यादा खुलासा नहीं किया गया है।

हाल ही में सामने आई कई रिपोटरें में संकेत दिया गया था कि स्वर्गीय सुशांत सिंह राजपूत अपनी मृत्यु से पहले 26/11 हमलों पर आधारित एक फिल्म के लिए बातचीत कर रहे थे। हालांकि इस परियोजना के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। पिछले साल, शिवसेना सांसद संजय राउत ने यह भी खुलासा किया कि वह जल्द ही 26/11 हमलों पर आधारित अनकही कहानियों पर एक फिल्म बनाएंगे।

फिल्म ट्रेड विश्लेषक गिरीश जौहर ने आईएएनएस से कहा, "सभी जानते हैं कि यह भारतीय इतिहास के सबसे काले अवधियों में से एक था। हर कोई विशेषकर मुंबईवासी हैरान थे। यह एक दाग बना हुआ है। यही कारण है कि इन उदाहरणों के बारे में बात करना प्रासंगिक हो जाता है। फिल्मकार त्रासदी के विभिन्न ²ष्टिकोणों के बारे में बता रहे हैं। दुकान के मालिकों के ²ष्टिकोण से, पुलिस अधिकारियों के ²ष्टिकोण से, और आतंकवादियों के ²ष्टिकोण से फिल्म बनी है।"

जौहर ने आगे कहा, "फिल्मकार त्रासदी की प्रासंगिकता को बनाए रखने के लिए विभिन्न ²ष्टिकोणों को पेश करते हैं, और यह जितना पुराना होता है, उतना ही दिलचस्प हो जाता है।"

--आईएएनएस

एमएनएस-एसकेपी

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

Don't Miss