नीतीश दागी विधायक मेवालाल को शिक्षा मंत्री बनाकर घिरे
Thursday, 19 November 2020 00:09

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पटना: जनता दल-युनाइटेड (जदयू) नेता मेवालाल चौधरी, कथित रूप से सहायक प्राध्यापकों और वैज्ञानिकों की भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं और वह नीतीश कुमार की नवगठित सरकार में बिहार के नए शिक्षा मंत्री बने हैं। यह कदम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए एक आत्म-लक्ष्य है, मगर इस कारण एनडीए भी बैकफुट पर आ गया है। सत्ताधारी चुप्पी साधे हुए हैं, क्योंकि ये नेता हाल ही में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर शून्य-सहिष्णुता का प्रचार कर रहे थे।

इस मुद्दे ने विपक्ष को जाहिर तौर पर एक बड़ा हथियार थमा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने एक ट्वीट में कहा, "जबकि तेजस्वी ने पहली कैबिनेट बैठक में पहले हस्ताक्षर से 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया था, नीतीश कुमार ने पहले कैबिनेट में एक दागी विधायक को प्राथमिकता दी और उन्हें मंत्री बनाया ..।"

राजद के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने आईएएनएस को बताया, "पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी दागी मेवालाल चौधरी और भ्रष्टाचार के भीष्म पितामह को खोज रहे थे। उन्हें नीतीश कुमार ने शिक्षा मंत्री के पद से सम्मानित किया है।"

कुछ साल पहले सुशील कुमार मोदी के एक बयान के हवाले से झा ने कहा, "4 साल पहले सुशील मोदी ने न्यायमूर्ति महफूज आलम समिति द्वारा बिहार कृषि विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर और वैज्ञानिकों की अवैध भर्ती के लिए दोषी पाए जाने के बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी। 2010 .. अब, वही विधायक बिहार के शिक्षा मंत्री बन गए हैं। भाजपा अब चुप क्यों है?"

बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा ने आईएएनएस से कहा, "महफूज आलम पैनल की रिपोर्ट के बाद, बिहार के राज्यपाल और अब राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें खारिज कर दिया था .. राज्यपाल की सिफारिशों के बाद, नीतीश कुमार को मजबूर किया गया था। उन्हें पार्टी से निष्कासित करने की मांग उठी थी। अब उन्हें ही शिक्षा मंत्री का पद दे दिया गया है .. नीतीश कुमार ने लोकतंत्र और बिहार की जनता का मजाक उड़ाया है।"

इससे पहले, मंगलवार को तेजस्वी ने मंत्री के बारे में ट्वीट किया था, "सीएम ने शिक्षा मंत्री को भ्रष्टाचार के कई मामलों में भगोड़ा बना दिया है .. इन तथ्यों के बावजूद, सीएम अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता का प्रचार करना जारी रखेंगे।"

उन्होंने इसके बारे में बुधवार को फिर से ट्विटर पर जानकारी दी। "सहायक प्रोफेसर भर्ती घोटाले में शामिल और शिक्षा मंत्री के रूप में भवन निर्माण में भ्रष्टाचार में शामिल मेवालाल चौधरी को नियुक्त करके, क्या सीएम ने उन्हें अधिक भ्रष्टाचार और लूट में लिप्त होने के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया है?"

मंत्री चौधरी ने बुधवार को पटना में पत्रकारों से कहा, "इस समय मामले कानून की अदालत में चल रहे हैं और इसका निर्णय सार्वभौमिक रूप से स्वीकार किया जाएगा। कुछ लोग बिना किसी कारण के मुझ पर आरोप लगा रहे हैं। किसी भी मामले में कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। मैं उन सभी आरोपों को खारिज करता हूं, जो मुझ पर लगाए गए।"

--आईएएनएस

एसजीके

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